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ब्रेकअप के बाद भी फिर से शुरू हो सकती है जिंदगी, ऐसे करें नई शुरुआत

ये बड़ी खूबसूरत सी बात है कि ज़िंदगी में बहुत सी चीज़ें थम सकती हैं, लेकिन ज़िंदगी किसी भी चीज़ के लिए नहीं थमती। अब प्यार को ही ले लीजिए। ज़िंदगी के तमामतर खूबसूरत एहसासों में से एक होता है। एक ऐसा रिश्ता, जिसमें किसी के साथ जुड़े दिल के तारों से हर रिश्ते का ताना-बाना बुना जाता है। जब किसी की ज़िंदगी में प्यार का आगाज़ होता है तो सारी दुनिया ही खूबसूरत नज़र आने लगती है।

हमें सांस लेते इंसानों से तो क्या, बेकार चीज़ों तक से प्यार होने लगता है, लेकिन जब यही प्यार भरा दिल कभी, किसी भी वजह से टूटता है तो सब-कुछ बिखर सा जाता है। वजूद के इन बिखरे हिस्सों को समेटने में वक्त लगता है। हां, मगर सच वही है कि ज़िंदगी किसी भी चीज़ के लिए नहीं रुकती।

अगर आपका दिल भी इस टूटन से गुजर चुका है, यानी आपने भी ब्रेकअप (breakup) का सामना किया है और अभी तक आपका दिल उस दर्द से उबर नहीं पाया है तो शायद इस लेख में यहां कहीं गई बातें शायद आपकी उस तकलीफ को काफी हद तक कम करने में मदद करें, क्योंकि इस लेख का आधार है, इस विषय पर देश के जाने-माने मनोवैज्ञानिक डॉक्टर समीर पारिख से की गई बातें।

ब्रेकअप को अपनी नाकामयाबी मत मान लीजिए

हर बीतता पल बहुत सारी खुशियां और बहुत सारे ग़म अपने में समेटे होता है और इन्हीं पलों की रफ्तार में सिमटी ज़िंदगी आगे बढ़ती रहती है। वक्त चाहे अच्छा हो या बुरा, ठहरता किसी के लिए नहीं है, कट ही जाता है। यही बात आपको भी समझने की ज़रूरत है। एक ऐसा रिश्ता, जो अपनी उम्र जी चुका और जिसके टूटने का मतलब ही यही है कि वह यहीं तक लिखा था, उसके साथ न तो अपनी जिंदगी को रुकने दीजिए और न ही उसके दर्द को ज्यादा देर ठहरने दीजिए।

शायद ही दुनिया में कोई ऐसा हो, जो किसी रिश्ते को तोड़ने के लिए ही जोड़े, लेकिन अब जब ऐसा हो ही चुका है तो आपको भी सबसे उसे स्वीकार करना है कि वह रिश्ता चाहे जितना खूबसूरत रहा हो, लेकिन वह था और जो इस पल का सच है, वह सिर्फ और सिर्फ आपका अपना वजूद है, इसलिए परवाह भी सिर्फ उसी की कीजिए।

इस टूटे रिश्ते के लिए खुद को कुसूरवार मानना बंद कर दीजिए, क्योंकि उन्हें कोई नहीं रोक सकता, जो आते ही जाने के लिए हैं। जिन्हें साथ देना होता है, वे हर हाल में साथ देते हैं। किसी ऊंची चढ़ाई के लिए एक रस्सी तक पर भरोसा करने के लिए उसे कई बार तेज झटके दिए जाते हैं। फिर ये तो उम्र भर के साथ की बात है और जिंदगी जितने झटके दे दे, कम हैं। सो सबसे पहली बात कि इस रिश्ते की टूटन के लिए खुद को और ज्यादा तोड़ना बंद कीजिए।

बह जाने दीजिए दर्द के दरिया को आंसुओं में

रोना कमज़ोरी की निशानी हर्गिज़ नहीं होती, चाहे कोई इस बारे में कुछ भी कहे। याद रखिए, रुका हुआ पानी सिर्फ सड़कर प्रदूषित होने और प्रदषण फैलाने के अलावा कुछ नहीं कर सकता। वे आंसू, जिन्हें आपने अपनी पलकों के पीछे बहुत हिम्मत से छिपाए रखा, अब थोड़ी हिम्मत और दिखाइए और उन्हें बह जाने दीजिए।

अगर आप किसी के सामने अपने दर्द का दरिया नहीं छलकाना चाहते तो कोई बात नहीं, मुंह धोते हुए या नहाते हुए आपको किसने रोका है। रोकिए, जी खोलकर रोइए और उतना रोइए, जितना कि आप हद से हद रो सकते हैं, बिना किसी परवाह, शर्म, डर, लोक-लाज वगैरह के, निकाल दीजिए अपने दिल की सारी भड़ास।

फिर याद रखिए, एक बार जब इस टूटे रिश्ते का दर्द बाहर निकल जाएगा तो ये दर्द अंदर ही अंदर पलकर नासूर बनने से बच जाएगा। बारिश के बाद निकली तेज़ धूप की चमक और खूबसूरती की बात ही क्या। आपके दिल का दरिया भी जितना छलकना था, छलक चुका, अब वक्त है उस पर समझदारी से नए बांध बनाने का। जो टूट चुका, उसे पूरी तरह से तोड़ कर साफ कर दीजिए, ताकि शुरुआत हो सके अपने अस्तित्व के नवसृजन की।

एक के जाने के दर्द को भुलाने के लिए नया सहारा मत तलाशिए

जज़्बात के रिश्ते बेल की तरह होते हैं। उन्हें जहां सहारा मिले, वे वहीं पनपने लगते हैं। अगर आपका अभी हाल ही में ब्रेकअप हुआ है तो बहुत ज़ाहिर सी बात है कि इसके दर्द से अभी आप उबरे नहीं हुए होंगे। आपको प्यार, विश्वास, समझदारी, साझेदारी और हमदर्दी, इन सभी की जरूरत है, लेकिन इस जरूरत को अपनी कमजोरी मत बनाइए। सही तरह से याद कीजिए, कमजोर तो आप कभी थे ही नहीं। पूछिए अपने मन से।

इस समय आप आहत जरूर हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप हमदर्दी को ही प्यार समझ लें। ऐसा नहीं है कि एक रिश्ते के टूटने के बाद आप अपनी जिंदगी से हर नए रिश्ते की गुंजाइश खत्म कर दें, लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं होना चाहिए कि इस टूटे रिश्ते का दर्द भुलाने के लिए ही आप एक नया रिश्ता जोड़ लें।

याद रखिए, ये भावनाओं के आवेग में बहकर उठाया गया एक गलत कदम साबित हो सकता है, जो मुमकिन है कि एक और टूटन की वजह बन जाए, इसलिए सावधानी और संयम से काम लीजिए। अपने-आप को थोड़ा वक्त दीजिए। इस भावनात्मक अकेलेपन से बाहर आने में थोड़ा वक्त लगेगा। तब तक अपना ध्यान दूसरी चीज़ों पर लगाएं। याद रखिए, ज़िंदगी में प्यार बहुत-कुछ है, मगर सब-कुछ नहीं। और भी ग़म हैं ज़माने में मुहब्बत से सिवाय।

फिर से समेटिए अपना विश्वास

ये बहुत स्वाभाविक सी बात है कि जो लोग बहुत ईमानदारी से किसी भी रिश्ते से जुड़े होते हैं, वे इस बात की कल्पना तक भी नहीं कर पाते कि उनकी तमामतर ईमानदारी और समर्पण के बावजूद ये रिश्ता कभी टूट भी सकता है।

जब कभी ऐसा हो जाता है तो इसे वे स्वीकार ही नहीं कर पाते हैं और तेज़ी से तनाव और डिप्रेशन जैसी चीज़ों की तरफ बढ़ने लगते हैं। उन्हें अपने ऊपर भरोसा ही नहीं रह जाता। वे उस टूटे रिश्ते का जिम्मेदार अपने-आप को मानने लगते हैं। इससे न तो उन्हें खुद पर भरोसा रह जाता है, न ही औऱों पर। जरूरत है इस स्थिति से बाहर आने की। याद रखिए, यहां हम कुछ ऐसे तरीके आपको बता रहे हैं, जो इस मामले में आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं-

लाइफ स्टाइल चेंजिंग से

अक्सर प्यार जैसे रिश्ते में होता ये है कि हमारी जिंदगी किसी एक इंसान के ही इर्द-गिर्द घूमने लगती है। हम सब कुछ उसी के हिसाब से करने लगते हैं। पता ही नहीं चलता कि हम अपनी खुद की पसंद-नापसंद भूलकर दूसरे की पसंद-नापसंद को ही अपना मानने लगते हैं। अब वक्त है अपनी खुद की पहचान नए सिरे से करने का। याद कीजिए कि आपको सचमुच क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं। आपको अब कोई जरूरत नहीं है किसी औऱ को खुश करने के लिए अपनी नापसंद को पसंद बनाने की। जिंदगी में थोड़ा बदलाव लाइए। याद रखिए, ये आसान बिल्कुल नहीं होगा, क्योंकि आप इस वक्त जिस लाइफ स्टाइल के आदी हो चुके हैं, उसे ही अपना मानते हैं। अब जब आप उसमें तब्दीली लाने की कोशिश कर रहे हैं तो ये आपको भारी लग सकता है, पर ये जरूरी है। सबसे पहले तो अपनी दिनचर्या में बदलाव लाइए। सिर्फ कुछ समय के लिए सूरज को उगते, चांद को चमकते, बारिश में भीगते और हवाओं में बेपरवाही से घूमने का आनंद लेकर दो देखिए।

बदल दीजिए उस ढर्रे को पूरी तरह से, जो आपका अपना नहीं था, बल्कि सिर्फ अपनाया हुआ था।

आज़मा कर देखिए एक्सरसाइज और मेडिटेशन का जादू

पुराने लोग अक्सर कहा करते थे कि पसीना जितना ज्यादा बहता है, आंसू उतने ही कम बहाने पड़ते हैं। हालांकि ये बात किसी और सिलसिले में कही गई है और यहां संदर्भ कुछ और है, फिर भी अर्थ मिल ही गया है। लाइफ स्टाइल में रेग्युलर एक्सरसाइज़ औऱ मेडिटेशन को यूं ही इतनी अहमियत नहीं दी गई है।

एक्सरसाइज़ जहां एक तरफ आपके शरीर को एक गठन देंगे, वहीं मेडिटेशन दिमाग की हर ऐंठन से आपको मुक्त कर देगी। इनकी बदौलत होने वाला बेहतरीन रक्तसंचार दिमाग की कोशिकाओं को भी स्वस्थ रखेगा और सोच में भी ताज़गी लाएगा। इसके लिए जरूरी नहीं है कि आप घंटों जिम में बिताएं। आज के दौर में एक्सरसाइज और मेडिटेशन तक के तौर-तरीके बदल चुके हैं।

 एक रेग्युलर वॉक से लेकर घर के काम-काज को तेज़ी औऱ चुस्ती-फुर्ती से करना भी किसी एक्सरसाइज से कम नहीं है। अपने मनपसंद गाने पर कुछ देर के लिए ऐसा झूमकर नाचिए कि फिर किसी और बात की याद ही न रह जाए।

खुद को सजाइए खुद के लिए

सजे-संवरे तो आप पहले भी कई बार होंगे, लेकिन हमेशा मन के किसी कोने में किसी और को ही लुभाने की चाह रहती थी। कान किसी से तारीफ के दो बोल सुनने को बेताब रहते थे। एक बार फिर से अपने-आप को सजाइए-संवारिए, लेकिन सिर्फ अपनी पसंद से और सिर्फ अपने लिए, बिल्कुल वैसे, जैसे आपको अच्छा लगता है। अगर आप खुद को इंडियन आउटफिट में कंफर्टेबल महसूस करते हैं तो वैसे और अगर आपको पसंद है टॉमबॉइश लुक तो वैसे ही सही। बाल चाहे लंबे हों या छोटे, होंठों पर नाजुक से रंगों की लिपस्टिक हो या बेपरवाह सी मुस्कान, अब जो होगा, आपकी पसंद का ही होगा।

नए स्टाइल, नए रंगों को अपनी जिंदगी में आने दीजिए।

शौक का लीजिए सहारा

अगर काफी कोशिशों के बावजूद आप ब्रेकअप के दर्द से पूरी तरह से उबर पाने में कामयाबी नहीं महसूस कर पा रहे हैं तो अपने पुराने शौक का सहारा लीजिए या फिर कोई नया शौक अपना लीजिए। चाहे गाना-गुनगुनाना हो या पैरों को थिरकाना, रंगों से कोई तस्वीर कैनवॉस पर उतारनी हो या कैमरे से कुदरत के किसी नजारे को अपनी गिरफ्त में लाना, किताबों की दुनिया भाती हो या खेल के मैदान से सम्मोहन जुड़ा हो, हॉर्स राइडिंग के लिए कभी जी मचला हो या स्विमिंग का इरादा कई बार बन-बनकर डूबा हो।

यही समय है किसी पुराने शौक को ताजा करने का या कोई नई हॉबी अपना लेने का। हो सकता है कि कभी आप लिखते बेहद अच्छा हों या ये भी हो सकता है कि वक्त ने कभी ये मौका ही न दिया हो कि आप किसी बात या आदत को अपना शौक बना सके हों तो जो पहले नहीं हुआ, उसे अब होने दीजिए।

नया कुछ सीखिए

साज-संवार सिर्फ तन की ही नहीं, मन की भी जरूरी होती है। एक बेहतरीन करियर या स्किन सिर्फ आपकी जानकारियां ही नहीं बढ़ाएगी, बल्कि आपकी शख्सियत में भी एक नया आत्मविश्वास और ताजगी लाएगी। ज्ञान, यानी नॉलिज की खासियत ही ये है कि ये भटकाव को ठहराव में बदल देती है। हो सकता है कि आपको लगे कि कोई नई स्किल, ट्रेनिंग, कोर्स वगैरह, इन सबकी आपको क्या जरूरत है।

ऐसा सोचते हुए रुककर कुछ पल ठहरिए और अपने-आप से पूछिए कि क्या ऐसा करने में कोई नुकसान है। फिर एक सवाल और कीजिए अपने-आप से ही कि क्या कभी इसका फायदा आपको मिल सकता है। जवाब हो सकता है कि आपको तुरंत न मिलकर समय की पिटारी में बंद हो, लेकिन इतना तय है कि आज की संवार में कल का निखार छिपा होता है।

दुनिया से भागिए नहीं, सोशल बनिए

हो सकता है कि चाहे दोस्त हों या पड़ोसी, रिश्तेदार हों या दूसरे परिचित, सभी आपके रिश्ते के बारे में जानते हों या फिर ये भी हो सकता है कि आपका रिश्ता तमाम दुनिया की निगाहों से बचा हुआ रहा हो।

अगर स्थिति पहले वाली है तो हो सकता है कि आपने अपने-आप को पूरी दुनिया से काटकर इसलिए समेट लिया हो कि आपके पास अपने टूटे रिश्ते को लेकर किए जाने वाले किसी भी सवाल का कोई जवाब नहीं हैं या फिर ये भी हो सकता है कि कोई कुछ न पूछे और आपके चेहरे पर जो दर्द है, वही सबको सब कुछ बता दे, लेकिन आप ऐसा नहीं चाहते, तब भी अपने-आप को समेट लेना किसी दर्द का इलाज नहीं है।

ये दुनिया बहुत खूबसूरत है। हो सकता है कि आपका ब्रेकअप इसलिए हुआ हो, क्योंकि अब उस शख्स को आपकी जरूरत नहीं रही, लेकिन इस दुनिया में अभी बहुत सारे लोग हैं, जिन्हें आपकी जरूरत है और उस लिस्ट में सबसे ऊपर और सबसे पहला नाम आप ही का है।

आप अपने-आप को किसी सोशल सर्विस से भी जोड़ सकते हैं या कोई और तरीका भी हो सकता है। यकीन मानिए, इनमें से हर तरीका आपके दर्द से उबारने में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन उसके लिए हाथ तो आप ही को बढ़ाना होगा। किसी के भी सवालों से घबराने की जरूरत नहीं है।

ये सवाल साये की तरह होते हैं, जब आप इनसे बचकर भागेंगे तो ये भी उतनी ही तेजी से आपका पीछा करेंगे, लेकिन अगर आप एक बार भी ठहरकर पूरी हिम्मत से इनका सामना करेंगे तो पीठ दिखाकर भागने की बारी दूसरों की होगी, आपकी नहीं।

क्या हर्ज है काउंसलिंग में

हम अगर चाहें तो बहुत कुछ कर सकते हैं, लेकिन कई बार हमारी अकेले की मदद हमारे लिए काफी नहीं होती। उस वक्त में सही-गलत, जरूरी-गैरजरूरी बातों में फर्क कर पाने की स्थिति में नहीं होते। ऐसे में अगर अपने ब्रेकअप के दर्द से उबरने, पुरानी बातें भुलाने और नई दिशा में जाने के लिए हमें किसी काउंसर, मेडिकल हेल्प वगैरह की भी जरूरत है तो इसमें हर्ज ही क्या है। आखिर इस पल हमारे लिए हमसे जरूरी और क्या हो सकता है।

एक्सपर्ट काउंसलर न सिर्फ इस धुंधली स्थिति से हमें बाहर लाने में मददगार साबित हो सकता है, बल्कि उसके पास हमारे उन जवाबों के सवाल भी छिपे होते हैं, जिन्हें हम अकेले पा सकने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। यहां हम एक नई शुरुआत कर रहे हैं तो हमें पुरानी सोच से भी बाहर आना होगा।

आखिर जब हमारे सिर में दर्द होता है या फिर हमें शरीर में कहीं चोट लग जाती है, कोई रोग लग जाता है, तब हम उसका इलाज भी तो करवाते ही हैं। फिर मन के रोग की दवा करने में क्या हर्ज है।

कुछ एक्सपर्ट टिप्स ज़िंदगी को दोबारा संवारने के लिए

जहां चाह वहां राह और जिंदगी हर रोज़ नई राहों पर चलने का नाम है। अगर एक राह पर कुछ कदम चलकर आपका सफर किसी के साथ अधूरा रह गया है तो कोई बात नहीं, हजार और राहों को अभी आपके कदमों का इंतजार है। बस जरूरत है कुछ तौर-तरीके अपनाने की तो कुछ छोड़ देने की। यहां हम उन्हीं के बारे में आपको बता रहे हैः

1. भले ही फोन ने हमारी दुनिया को जोड़ दिया है, लेकिन इस फोन पर उनकी कॉल का इंतजार मत कीजिए, जिनके तार आपसे हमेशा के लिए टूट चुके हैं।


2. जितनी जल्दी हो सके, इस रिश्ते से जुड़ी चीज़ों को अपने से दूर करके उनकी जगह एक नयापन सजा दीजिए। चाहे वे पुराने गिफ्ट हों, लैटर्स हों या यादों का कोई और रूप, बार-बार उन्हें दोहराने पर भी वे सिवाय दुख के अब औऱ कुछ नहीं दे सकतीं, इसलिए उनसे जितनी जल्दी हो सके, दूरी बना लीजिए।


3. अगर इस टूटे रिश्ते को लेकर मन कुछ ज्यादा ही कड़वी यादों से भरा है, जिन्हें आप किसी से शेयर तक नहीं करना चाहते तो इन्हें कागज पर बार-बार तब तक लिखिए, जब तक कि आप अपनी बातों से खुद ही उकताने न लगें। फिर उसके बाद उन कागजों को जला दीजिए।


4. डांस सिर्फ दिल ही नहीं बहलाता है, बल्कि ये एक ऐसी थैरेपी भी है, जो दिल का मरहम भी बन जाता है। कभी डांसिंग योगा, डांसिंग मेडिटेशन या डांसिंग एक्सरसाइज के किसी रूप को आजमाइए.


5. अपने ब्रेकअप को लोगों के मजे या अपने डर की चीज़ मत बनाइए। आप जितना लोगों से या अपने-आप से इस मामले में बचने की कोशिश करेंगे, उतना ही ज्यादा आपको इसका सामना करना पड़ सकता है। सो भागिए नहीं, डटकर सामना कीजिए अपने डर का।

6. हो सके तो अपने कॉमन फ्रेंड्स से इस समय थोड़ी दूरी बना लीजिए और बार-बार इसी टॉपिक पर सोचने की बजाय नएपन को अपनी जिंदगी में जगह दीजिए।


7. एक अच्छा सा टूर या किसी नई जगह की ट्रेवल प्लानिंग इस समय एक अच्छा आइडिया हो सकता है। इस टूटे रिश्ते के लिए अपने-आप को इतना भी मत तोड़ दीजिए कि आपका आईना भी आपकी सूरत न पहचान सके। अपने लुक और हेल्थ पर पूरा-पूरा ध्यान दीजिए।

अगर आप खुद ऐसा कर पाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं तो ये जिम्मेदारी कुछ वक्त के लिए अपने परिवार, दोस्तों या बहुत परिचित लोगों को सौंप दीजिए.


8. एक बड़ी गलती अक्सर लोग ब्रेकअप के बाद करते हैं, वह ये है कि वे उस जा चुके शख्स में सिर्फ बुराइयां ही बुराइयां खुद भी ढूंढते हैं और दूसरों को भी गिनवाते हैं। ये बात सिरे से गलत है।

ऐसा करना गरिमा के भी खिलाफ है, क्योंकि जो लोग आपकी जबान से इस ब्रेकअप और आपके एक्स पार्टनर की बुराइयां सुनेंगे, वे चार बुराइयां आपमें भी निकाल ही लेंगे। साथ ही ये उस रिश्ते का भी अपमान है, जो आपने इतने समय तक जिया है। जितना हो सके, इससे बचें।


9. यादों को भुलाना अगर आसान न लग रहा तो भी कम से कम उसके कड़वेपन को तो अपने से दूर ही रखें। किसी एक बुरे हादसे पर ठहर जाने की बजाय जिंदगी को अपनी रफ्तार से आगे बढ़ने दीजिए। वह अपने लिए नई राह खुद तलाश लेगी।

ब्रेकअप से जुड़े कुछ सवाल-जवाब

1. मेरा हाल ही में ब्रेकअप हुआ है, लेकिन मैं इसी रिश्ते को दोबारा जोड़ना चाहती हूं। कोई उपाय बताइए।
जहां तक ब्रेकअप के बाद फिर से इस रिश्ते को जोड़ने की बात है तो ये सवाल आप खुद से ही पूछिए कि क्या वाकई आप इसे फिर से जोड़ना चाहती हैं। भले ही ये रिश्ता आपकी वजह से न टूटा हो, मगर टूटा तो है न। जिसे जाना था, वह बिना आपके जज्बात की परवाह किए गया है कि आप पर इस ब्रेकअप का क्या असर पड़ेगा।

फिर आप क्यों चाहती हैं कि ये दुख बार-बार दोहराया जाए। फिर सबसे बड़ी बात क्या आप वाकई इतनी कमजोर हैं कि हर अपमान के सहकर भी इस रिश्ते को बचाना चाहती हैं, जो टूट चुका है। इसका सही जवाब आप भी जानती हैं, बस अभी प्यार और लगाव की टूटन ने इस परत को धुंधला किया हुआ है, इसलिए आप सही तस्वीर नहीं देख पा रही हैं।

हमारी राय है कि आप थोड़ा वक्त अभी सिर्फ और सिर्फ अपने-आप को दीजिए। यहां बताई गई बातों को अपनाने की कोशिश कीजिए और उसके बाद ये सवाल खुद से पूछिएगा। 


2. हमारे ब्रेकअप को अभी थोड़ा ही समय हुआ है, पर मेरी पार्टनर शादी कर रही है और मैं ये सह नहीं पा रहा हूं। क्या करूं?
अच्छा तो यही होगा कि आप सबसे पहले इस बात को ही स्वीकार कर लीजिए कि ये रिश्ता अब न सिर्फ टूट चुका है, बल्कि आपकी एक्स पार्टनर इससे आगे भी बढ़ चुकी है।

अगर आप इस नई स्थिति से अपने को बेहद आहत महसूस कर रहे हैं और इस मामले में अपनी मदद खुद नहीं कर पा रहे हैं तो बेहतर होगा कि आप इस मामले में किसी काउंसलर की मदद लें। उसके पास आपकी स्थिति को समझकर आपको इससे बाहर लाने का रास्ता निश्चित तौर पर मौजूद होगा। 

3.हमारा रिलेशन बहुत लंबा चला था। अब तो मुझे अपना कोई शौक याद भी नहीं। खुद को खोया सा महसूस कर रही हूं। ऐसे में नई शुरुआत कहां से करूं?
हमने इस लेख में भी ऐसी बहुत सी बातें बताने की कोशिश की है, जो आपको इस स्थिति से बाहर लाने में मदद कर सकती हैं। फिर भी अच्छा तो यही होगा कि आप अपने रुटीन में सबसे पहले एक्सरसाइज और मेडिटेशन को नियमित रूप से शामिल कीजिए।

अपने पुराने किसी शौक को ताजा कीजिए या किसी नए शौक की गुंजाइश अपनी जिंदगी में बनाइए। जब आप नई आदतों और नई ताज़गी के साथ सोचेंगी तो नई राहें भी जरूर नजर आएंगी।


4. मुझे नहीं लगता कि दिल के दर्द का इलाज योगा-मेडिटेशन में छिपा है। फिर लोग इसकी सलाह क्यों देते हैं?
आपके सवाल का जवाब देने की बजाय हम आप ही से ये जानना चाहेंगे कि क्या आपने योगा-मेडिटेशन का कभी सहारा लेकर देखा है। अगर इस बात को महत्व मिला है तो ये यूं ही नहीं है। हमारा मशवरा तो यही है कि पहले ये आजमाइए, फिर बताइए। दरअसल ये कोई चमत्कार नहीं, सिर्फ विज्ञान है, जो तन से और मन से जुड़ा है।


5. हमारे रिश्ते के बारे में सभी जानते थे। अब जबकि हमारा ब्रेकअप हो गया है तो लोगों के सवालों के डर से मुझे अकेले रहना ही अच्छा लगता है। इसमें हर्ज भी क्या है?
अकेले रहने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन एकांत और अकेलेपन में फर्क होता है। आपका रिश्ता आपकी बीती जिंदगी का एक अटूट सच है। आप चाहें भी तो इससे भाग नहीं सकती है और फिर भागने की जरूरत है भी क्यों। क्या इस रिश्ते में ऐसा कुछ नहीं था, जो कभी भी अच्छा रहा हो।

जिसके कारण आप इस रिश्ते में बने रहे। अब अगर ये रिश्ता टूट गया है तो इसका मतलब ये तो नहीं होना चाहिए कि इसके साथ ही इस रिश्ते से जुड़ा हर अच्छा पक्ष ही खत्म हो गया। एक बार उन पलों को याद कीजिए।

इस टूटन के कारणों को ईमानदारी से स्वीकारिए। जिस पल आप इस स्थिति को मन से स्वीकार कर लेंगे, उसी पल से आपके पास हर सवाल का जवाब भी मौजूद होगा।

(यह लेख जाने-माने मनोचिकित्सक डॉक्टर समीर पारिख से बातचीत पर आधारित है।)

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